हम निरन्तर आगे बढ़ें, खूब पढ़ें-लिखें और नई ऊँचाइयों को हासिल करें। जैसे हम कल थे उससे बेहतर आज हों, और कल उससे भी बेहतर होने की कोशिश करें। मुनिश्री क्षमासागर जी का यही मानना था।
हम अगर विद्यार्थी हैं तो बेहतर विद्यार्थी बनें; अगर पुत्र हैं तो एक बेहतर पुत्र बनें; बेहतर डॉक्टर, वैज्ञानिक, इंजीनियर, एक बेहतर देशवासी और एक बेहतर इंसान बनें। निरन्तर प्रगति-पथ पर आगे बढ़ें, पर प्रगति ऐसी हो जो आत्म-हित के साथ-साथ पर-हित में भी सहायक हो। प्रगति जो स्वयं के जीवन से शुरू होकर समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचे, वही वास्तविक प्रगति है, वही वास्तविक प्रतिभा है।
ऐसी ही प्रतिभाओं का सम्मान एवं ऐसी प्रगति के लिए प्रेरणा देना ही ‘यंग जैना अवार्ड’ का उद्देश्य है। भगवान महावीर के 2600वें निर्वाण महोत्सव के अवसर पर वर्ष 2001 में ‘यंग जैना अवार्ड’ की शुरुआत आचार्य श्री विद्यासागर जी के परम शिष्य मुनिश्री क्षमासागर जी की प्रेरणा से हुई।
मुनिश्री स्वयं एम.टेक. में गोल्ड मेडलिस्ट थे। उन्हें बच्चों, विद्यार्थियों एवं उच्च शिक्षा के प्रति गहरा लगाव और सम्मान था। वे अपने जीवन में विज्ञान एवं धर्म — दोनों को समान गहराई से जीते थे। मुनिश्री हर कार्य को पूर्ण दक्षता और श्रेष्ठता से करने में विश्वास रखते थे तथा बच्चों को भी ऐसा ही करने की प्रेरणा देते थे।
वे विद्यार्थियों को अनुशासन, कड़ी मेहनत और बहुआयामी सफलता के लिए प्रेरित करते थे — ऐसी सफलता जो केवल भौतिक उपलब्धियों तक सीमित न हो। छात्रों को सम्मान एवं स्नेह प्रदान करने हेतु ‘यंग जैना अवार्ड’ का आयोजन इसी प्रेरणा की परिणति है।
यह कार्यक्रम दो से तीन दिन की कार्यशाला (Workshop) के रूप में आयोजित किया जाता है, जिसमें पुरस्कृत विद्यार्थियों हेतु उपयोगी एवं प्रेरणादायक सत्र रखे जाते हैं। यह कार्यक्रम छात्रों के व्यक्तित्व विकास (Personality Development), मूल्य-आधारित जीवनशैली तथा श्रेष्ठ करियर निर्माण के साथ विज्ञान एवं धर्म के समन्वय पर विशेष रूप से केंद्रित रहता है।
वर्ष 2001 में शिवपुरी में बारहवीं कक्षा के 224 विद्यार्थियों के साथ आरम्भ हुआ ‘यंग जैना अवार्ड’ आज प्रतिष्ठित पुरस्कार समारोहों में शामिल हो चुका है। देश के 23 से अधिक राज्यों एवं विभिन्न शिक्षा बोर्डों के 21,000 से भी अधिक छात्र-छात्राएँ इस पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं। आज ‘यंग जैना अवार्ड’ प्राप्त करने वाले हजारों विद्यार्थी मूल्य-आधारित जीवनशैली के साथ प्रतिष्ठित संस्थानों एवं संगठनों में कार्यरत हैं।